Exam Details
UPSSSC VDO (23RD DECEMBER) 2018
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Questions
150
Duration
180 mins
Package
UP State Exams - Previous Year Papers
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Topic distribution
Subtopic distribution
Difficulty distribution
150questions
Medium
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50.7%
Easy
50
33.3%
Hard
24
16%
Question type distribution
150questions
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150
100%
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2018 · Unclassified
UPSSSC VDO (23RD DECEMBER) 2018
उत्साह की गिनती अच्छे गुणों में होती है। किसी भाव के अच्छे या बुरे होने का निश्चय अधिकतर उसको प्रवृत्ति के शुभ या अशुभ के परिणाम के विचार से होता है। वही उत्साह जो कर्तव्य कर्मों के प्रति इतना सुन्दर दिखायी पड़ता है, अकर्तव्य कर्मों की ओर होने पर वैसा श्लाघ्य प्रतीत नहीं होता। आत्मरक्षा, पररक्षा, देश रक्षा आदि के निमित्त साहस की जो उमंग देखी जाती है उसके सौन्दर्य को परपीडन डकैती आदि कर्मों का साहस कभी नहीं पहुँच सकता। यह बात होते हुए भी विशुद्ध उत्साह या साहस की प्रशंसा संसार में थोड़ी बहुत होती ही है। अत्याचारियों या डाकुओं के शौर्य व साहस की कथाएं भी लोग तारीफ करते हुए भी सुनते हैं।
उपरोक्त गद्यांश के आधार पर निम्न प्रश्न के उत्तर दीजिए।
गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक बताइए:
उपरोक्त गद्यांश के आधार पर निम्न प्रश्न के उत्तर दीजिए।
गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक बताइए:
2018 · Unclassified
UPSSSC VDO (23RD DECEMBER) 2018
PSG1 . कुन्ती अपने लाडले लाल को, अपने हृदय के टुकडे को, अपने प्यारे नवजात शिशु को नदी में छोड कर लौट आयी। वह छोटी नदी थी। वायु अनुकूल थी, दैव की गति जानी नहीं जाती। वह नदी चम्बल नदी में जाकर मिलती है। अब शिशु की पिटारी बहती-बहती चम्बल नदी में आ गयी। इटावे के पास चम्बल नदी आकर श्रीयमुना जी में मिलती है अतः चम्बल के प्रवाह के साथ वह भी यमुना जी में आ गयी और यमुना जी के साथ प्रयाग की ओर बढ़ी। तीर्थराज प्रयाग मे जाकर श्री यमुना जी गंगा जी मे मिल जाती है अतः अब वह मंजूषा शिशु को लेकर काशी की ओर बहने लगी। उसके साथ न कोई मल्लाह था न पथ प्रर्दशक। भाग्य उसे स्वयं ही बहाकर ले जा रहा था।
काशीपुरी, पाटलिपुत्र आदि राज्यों की सीमा को पार करती हुई गंगा जी के प्रवाह के साथ वह मंजूषा बिना किसी रूकावट के आगे बढी चली जा रही थी। आगे चलकर वह अंग देश की सीमा में पहुँची। अब मानो उसकी यात्रा समाप्त होगी उसी समय चंपा नगरी के राजा अधिरथ अपनी स्त्री राधा और अपने सेवकों के सहित गंगा स्नान करने आये थे। उन्होंने दूर से इस सुन्दर-सी पेटी को जाह्नवी की लहरों के साथ क्रीडा करते देखा। अंत में उन्होंने अपने सेवकों को आज्ञा दी – सामने यह जो मंजूषा बहती जा रही है उसे पकड़ कर लाओ।
कुंती अपने नवजात सुकुमार शिशु को कहाँ छोडकर आई थी?
काशीपुरी, पाटलिपुत्र आदि राज्यों की सीमा को पार करती हुई गंगा जी के प्रवाह के साथ वह मंजूषा बिना किसी रूकावट के आगे बढी चली जा रही थी। आगे चलकर वह अंग देश की सीमा में पहुँची। अब मानो उसकी यात्रा समाप्त होगी उसी समय चंपा नगरी के राजा अधिरथ अपनी स्त्री राधा और अपने सेवकों के सहित गंगा स्नान करने आये थे। उन्होंने दूर से इस सुन्दर-सी पेटी को जाह्नवी की लहरों के साथ क्रीडा करते देखा। अंत में उन्होंने अपने सेवकों को आज्ञा दी – सामने यह जो मंजूषा बहती जा रही है उसे पकड़ कर लाओ।
कुंती अपने नवजात सुकुमार शिशु को कहाँ छोडकर आई थी?
2018 · Unclassified
UPSSSC VDO (23RD DECEMBER) 2018
PSG1 . कुन्ती अपने लाडले लाल को, अपने हृदय के टुकडे को, अपने प्यारे नवजात शिशु को नदी में छोड कर लौट आयी। वह छोटी नदी थी। वायु अनुकूल थी, दैव की गति जानी नहीं जाती। वह नदी चम्बल नदी में जाकर मिलती है। अब शिशु की पिटारी बहती-बहती चम्बल नदी में आ गयी। इटावे के पास चम्बल नदी आकर श्रीयमुना जी में मिलती है अतः चम्बल के प्रवाह के साथ वह भी यमुना जी में आ गयी और यमुना जी के साथ प्रयाग की ओर बढ़ी। तीर्थराज प्रयाग मे जाकर श्री यमुना जी गंगा जी मे मिल जाती है अतः अब वह मंजूषा शिशु को लेकर काशी की ओर बहने लगी। उसके साथ न कोई मल्लाह था न पथ प्रर्दशक। भाग्य उसे स्वयं ही बहाकर ले जा रहा था।
काशीपुरी, पाटलिपुत्र आदि राज्यों की सीमा को पार करती हुई गंगा जी के प्रवाह के साथ वह मंजूषा बिना किसी रूकावट के आगे बढी चली जा रही थी। आगे चलकर वह अंग देश की सीमा में पहुँची। अब मानो उसकी यात्रा समाप्त होगी उसी समय चंपा नगरी के राजा अधिरथ अपनी स्त्री राधा और अपने सेवकों के सहित गंगा स्नान करने आये थे। उन्होंने दूर से इस सुन्दर-सी पेटी को जाह्नवी की लहरों के साथ क्रीडा करते देखा। अंत में उन्होंने अपने सेवकों को आज्ञा दी – सामने यह जो मंजूषा बहती जा रही है उसे पकड़ कर लाओ।
मंजूषा को कौन लेकर जा रहा था?
काशीपुरी, पाटलिपुत्र आदि राज्यों की सीमा को पार करती हुई गंगा जी के प्रवाह के साथ वह मंजूषा बिना किसी रूकावट के आगे बढी चली जा रही थी। आगे चलकर वह अंग देश की सीमा में पहुँची। अब मानो उसकी यात्रा समाप्त होगी उसी समय चंपा नगरी के राजा अधिरथ अपनी स्त्री राधा और अपने सेवकों के सहित गंगा स्नान करने आये थे। उन्होंने दूर से इस सुन्दर-सी पेटी को जाह्नवी की लहरों के साथ क्रीडा करते देखा। अंत में उन्होंने अपने सेवकों को आज्ञा दी – सामने यह जो मंजूषा बहती जा रही है उसे पकड़ कर लाओ।
मंजूषा को कौन लेकर जा रहा था?
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PSG1 . कुन्ती अपने लाडले लाल को, अपने हृदय के टुकडे को, अपने प्यारे नवजात शिशु को नदी में छोड कर लौट आयी। वह छोटी नदी थी। वायु अनुकूल थी, दैव की गति जानी नहीं जाती। वह नदी चम्बल नदी में जाकर मिलती है। अब शिशु की पिटारी बहती-बहती चम्बल नदी में आ गयी। इटावे के पास चम्बल नदी आकर श्रीयमुना जी में मिलती है अतः चम्बल के प्रवाह के साथ वह भी यमुना जी में आ गयी और यमुना जी के साथ प्रयाग की ओर बढ़ी। तीर्थराज प्रयाग मे जाकर श्री यमुना जी गंगा जी मे मिल जाती है अतः अब वह मंजूषा शिशु को लेकर काशी की ओर बहने लगी। उसके साथ न कोई मल्लाह था न पथ प्रर्दशक। भाग्य उसे स्वयं ही बहाकर ले जा रहा था।
काशीपुरी, पाटलिपुत्र आदि राज्यों की सीमा को पार करती हुई गंगा जी के प्रवाह के साथ वह मंजूषा बिना किसी रूकावट के आगे बढी चली जा रही थी। आगे चलकर वह अंग देश की सीमा में पहुँची। अब मानो उसकी यात्रा समाप्त होगी उसी समय चंपा नगरी के राजा अधिरथ अपनी स्त्री राधा और अपने सेवकों के सहित गंगा स्नान करने आये थे। उन्होंने दूर से इस सुन्दर-सी पेटी को जाह्नवी की लहरों के साथ क्रीडा करते देखा। अंत में उन्होंने अपने सेवकों को आज्ञा दी – सामने यह जो मंजूषा बहती जा रही है उसे पकड़ कर लाओ।
राजा अधिरथ ने सेवकों को क्या आज्ञा दी थी?
काशीपुरी, पाटलिपुत्र आदि राज्यों की सीमा को पार करती हुई गंगा जी के प्रवाह के साथ वह मंजूषा बिना किसी रूकावट के आगे बढी चली जा रही थी। आगे चलकर वह अंग देश की सीमा में पहुँची। अब मानो उसकी यात्रा समाप्त होगी उसी समय चंपा नगरी के राजा अधिरथ अपनी स्त्री राधा और अपने सेवकों के सहित गंगा स्नान करने आये थे। उन्होंने दूर से इस सुन्दर-सी पेटी को जाह्नवी की लहरों के साथ क्रीडा करते देखा। अंत में उन्होंने अपने सेवकों को आज्ञा दी – सामने यह जो मंजूषा बहती जा रही है उसे पकड़ कर लाओ।
राजा अधिरथ ने सेवकों को क्या आज्ञा दी थी?
2018 · Unclassified
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PSG1 . कुन्ती अपने लाडले लाल को, अपने हृदय के टुकडे को, अपने प्यारे नवजात शिशु को नदी में छोड कर लौट आयी। वह छोटी नदी थी। वायु अनुकूल थी, दैव की गति जानी नहीं जाती। वह नदी चम्बल नदी में जाकर मिलती है। अब शिशु की पिटारी बहती-बहती चम्बल नदी में आ गयी। इटावे के पास चम्बल नदी आकर श्रीयमुना जी में मिलती है अतः चम्बल के प्रवाह के साथ वह भी यमुना जी में आ गयी और यमुना जी के साथ प्रयाग की ओर बढ़ी। तीर्थराज प्रयाग मे जाकर श्री यमुना जी गंगा जी मे मिल जाती है अतः अब वह मंजूषा शिशु को लेकर काशी की ओर बहने लगी। उसके साथ न कोई मल्लाह था न पथ प्रर्दशक। भाग्य उसे स्वयं ही बहाकर ले जा रहा था।
काशीपुरी, पाटलिपुत्र आदि राज्यों की सीमा को पार करती हुई गंगा जी के प्रवाह के साथ वह मंजूषा बिना किसी रूकावट के आगे बढी चली जा रही थी। आगे चलकर वह अंग देश की सीमा में पहुँची। अब मानो उसकी यात्रा समाप्त होगी उसी समय चंपा नगरी के राजा अधिरथ अपनी स्त्री राधा और अपने सेवकों के सहित गंगा स्नान करने आये थे। उन्होंने दूर से इस सुन्दर-सी पेटी को जाह्नवी की लहरों के साथ क्रीडा करते देखा। अंत में उन्होंने अपने सेवकों को आज्ञा दी – सामने यह जो मंजूषा बहती जा रही है उसे पकड़ कर लाओ।
चम्पा नगरी के राजा किसके साथ गंगा-स्नान करने आए थे?
काशीपुरी, पाटलिपुत्र आदि राज्यों की सीमा को पार करती हुई गंगा जी के प्रवाह के साथ वह मंजूषा बिना किसी रूकावट के आगे बढी चली जा रही थी। आगे चलकर वह अंग देश की सीमा में पहुँची। अब मानो उसकी यात्रा समाप्त होगी उसी समय चंपा नगरी के राजा अधिरथ अपनी स्त्री राधा और अपने सेवकों के सहित गंगा स्नान करने आये थे। उन्होंने दूर से इस सुन्दर-सी पेटी को जाह्नवी की लहरों के साथ क्रीडा करते देखा। अंत में उन्होंने अपने सेवकों को आज्ञा दी – सामने यह जो मंजूषा बहती जा रही है उसे पकड़ कर लाओ।
चम्पा नगरी के राजा किसके साथ गंगा-स्नान करने आए थे?
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जब कोई सरकारी पत्र ज्ञापन या कार्यालय ज्ञापन एक साथ अनेक प्रेषितयों को भेजा जाए उसे क्या कहते है?